महाकुंभ 2025,भारतीय संस्कृति की समृद्धि को प्रदर्शित कर रहा है

महाकुंभ 2025, अपनी भव्यता और आध्यात्मिकता के साथ, भारतीय संस्कृति की समृद्धि को प्रदर्शित कर रहा है…

 

 

श्रद्धालुओं की संख्या:

23 जनवरी 2025 तक, प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ में 10 करोड़ से अधिक श्रद्धालु आ चुके हैं। मकर संक्रांति (14 जनवरी 2025) के अवसर पर, एक ही दिन में लगभग 3.5 करोड़ भक्तों ने पवित्र त्रिवेणी संगम में स्नान किया। इस वर्ष महाकुंभ में कुल 45 करोड़ श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है, जिसमें लगभग 15 लाख विदेशी पर्यटक भी शामिल हैं।

इन्फ्रास्ट्रक्चर और व्यवस्थाएं:

महाकुंभ 2025 के सफल आयोजन के लिए व्यापक इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास किया गया है, जिसमें 14 नए फ्लाईओवर, 9 स्थायी घाट, 7 नए बस स्टैंड और 12 किलोमीटर अस्थायी घाट शामिल हैं। सुरक्षा के लिए 50,000 से अधिक पुलिसकर्मी, 14,000 होम गार्ड और 2,750 एआई-आधारित सीसीटीवी कैमरे तैनात किए गए हैं। स्वास्थ्य सेवाओं में 6,000 बिस्तर और 43 अस्पताल उपलब्ध कराए गए हैं।

 

अंतर्राष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल का दौरा:

16 जनवरी 2025 को, 10 देशों के 21 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने संगम में पवित्र स्नान किया। इन देशों में फिजी, फिनलैंड, गुयाना, मलेशिया, मॉरीशस, सिंगापुर, दक्षिण अफ्रीका, श्रीलंका, त्रिनिदाद और टोबैगो, और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं।

आर्थिक प्रभाव:

महाकुंभ 2025 से भारतीय अर्थव्यवस्था को लगभग 2 लाख करोड़ रुपये का प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है। उत्तर प्रदेश की जीडीपी में 1% से अधिक की वृद्धि का अनुमान है। दैनिक आवश्यक वस्तुओं का कारोबार 17,310 करोड़ रुपये तक पहुंचने की संभावना है, जबकि होटल और यात्रा सेवाओं में 2,800 करोड़ रुपये का व्यापार होने की उम्मीद है।

सांस्कृतिक कार्यक्रम:

महाकुंभ के दौरान, 24 फरवरी 2025 तक, शंकर महादेवन, मोहित चौहान, कैलाश खेर जैसे प्रसिद्ध कलाकारों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं.

महाकुंभ 2025 आस्था, एकता और सांस्कृतिक भव्यता का प्रतीक बना हुआ है, जो भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और आर्थिक समृद्धि को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करता है।

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