SEBI Mutual Fund New Regulations!
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने हाल ही में म्यूचुअल फंड से जुड़े नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं, जो निवेशकों और एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (AMC) दोनों के लिए महत्वपूर्ण हैं।
1. विशेषीकृत निवेश कोष (Specialized Investment Funds – SIF):
SEBI ने उच्च जोखिम उठाने में सक्षम निवेशकों के लिए विशेषीकृत निवेश कोष (SIF) की शुरुआत की है। ये कोष आधुनिक निवेश रणनीतियों, जैसे लॉन्ग-शॉर्ट इक्विटी, में निवेश की अनुमति देंगे। इनमें प्रति निवेशक न्यूनतम निवेश राशि 10 लाख रुपये निर्धारित की गई है, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि केवल योग्य और सक्षम निवेशक ही इनमें भाग लें।
2. म्यूचुअल फंड लाइट (MF Lite) फ्रेमवर्क:
पैसिव रूप से प्रबंधित फंड्स, जैसे इंडेक्स फंड्स और एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स (ETFs), के लिए SEBI ने ‘म्यूचुअल फंड लाइट’ फ्रेमवर्क पेश किया है। इसका उद्देश्य अनुपालन आवश्यकताओं को सरल बनाना, नए खिलाड़ियों को बाजार में प्रवेश के लिए प्रोत्साहित करना, और निवेशकों के लिए विविधता और नवाचार को बढ़ावा देना है। इस फ्रेमवर्क के तहत, AMC के लिए न्यूनतम नेटवर्थ आवश्यकता 35 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है, जिसे लगातार पांच वर्षों तक लाभदायक रहने पर 25 करोड़ रुपये तक घटाया जा सकता है।
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3. नई फंड योजनाओं के लिए निधि उपयोग की समयसीमा:
SEBI ने प्रस्तावित किया है कि नई फंड ऑफर (NFO) से प्राप्त धनराशि को निवेशकों को आवंटन के 30 दिनों के भीतर निवेशित किया जाए। यदि आवश्यक हो, तो AMC की निवेश समिति की स्वीकृति से अतिरिक्त 30 दिनों का विस्तार दिया जा सकता है। इस समयसीमा का पालन न करने पर AMC नई योजनाएं लॉन्च करने या एग्जिट लोड लगाने से वंचित हो सकती हैं।
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4. कस्टोडियन के लिए सख्त नियम:
SEBI ने कस्टोडियन के लिए नियमों को सख्त करने का प्रस्ताव दिया है, जिसमें उनकी न्यूनतम नेटवर्थ आवश्यकता को 50 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 100 करोड़ रुपये करना शामिल है। कस्टोडियन वे संस्थाएं हैं जो विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों और म्यूचुअल फंड्स जैसे ग्राहकों के लिए सुरक्षा और खाता प्रबंधन का कार्य करती हैं।
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ये सभी बदलाव दिसंबर 2024 से प्रभावी हो गए हैं, और इनका उद्देश्य म्यूचुअल फंड उद्योग में पारदर्शिता, निवेशकों की सुरक्षा, और बाजार में नवाचार को बढ़ावा देना है।

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